मीराबाई के बारे में आलोचकों के मत

·  मीरा ने लिखा है-लोक लाज कुल कानि जगत की, दइ बहाय जस पानी.अपने घर का पर्दा कर ले, मैं अबला बौरानी..·       . मैनेजर पाण्डेय लिखते हैं- “प्रेम ही मीरा के सामाजिक संघर्ष का साधन है और साध्य भी.”·     कबीर ने कहा था कि ‘प्रेम का घर खाला का घर नहीं है’. लेकिन मीरा की प्रेम साधना कबीर के प्रेम …

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बाँध

दो बाँधों के बीच में बहने वाली नदियों में यदि गहराई हो तो वे शांत गंभीर और सुंदर लगती है। बाँध को तोड़कर बहने वाली नदियां सोचती हैं कि वे आज़ाद हैं स्वच्छंद हैं बंधनमुक्त हैं लेकिन समझती नहीं कि वे कितने घरों को वनों को खेत व खलिहानों को नष्ट और बर्बाद कर देती …

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सूरदास का ‘भ्रमरगीत’

सूरदास का ‘भ्रमरगीत’ और उसके पद (पद सं. 21-70) अनेक आलोचकों ने भ्रमरगीत प्रसंग को ‘सूरसागर’ का सर्वोत्कृष्ट अंश बताया है. आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने सूरसागर से ‘भ्रमरगीत’ के प्रसंगों को ढूंढ़कर निकाला और उसे संपादित कर ‘भ्रमरगीत सार’ नाम से पाठक समुदाय के सामने रखा. इस संपादित पुस्तक के आरंभ में ही शुक्ल जी …

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‘रेवा तट’

‘पृथ्वीराज रासो’ के ‘रेवा तट’ सर्ग का कथानक: ‘रेवा तट’ पृथ्वीराज रासो का 27वां सर्ग है। इसमें पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गोरी की लड़ाई का वर्णन है। गोरी को जब पता चलता है कि चौहान रेवा तट पर शिकार करने गया है तभी वह अपनी सेना के साथ चौहान पर आक्रमण कर देता है। किंतु …

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रेवा तट

‘पृथ्वीराज रासो’ के ‘रेवा तट’ सर्ग का कथानक: ‘रेवा तट’ पृथ्वीराज रासो का 27वां सर्ग है। इसमें पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गोरी की लड़ाई का वर्णन है। गोरी को जब पता चलता है कि चौहान रेवा तट पर शिकार करने गया है तभी वह अपनी सेना के साथ चौहान पर आक्रमण कर देता है। किंतु …

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साहित्य बदलता है, हिन्दी साहित्य बिल्कुल बदल रहा है

परिवर्तन समाज का नियम है और यही नियम साहित्य के क्षेत्र में भी लागू होता है. इसे हम स्वीकार तो कर सकते हैं, मगर इस शर्त के साथ कि, जिसे आज समाज द्वारा स्वीकार किया जा रहा है. ये कल उतना ही प्रभावी रहेगा जितना ये आज है साहित्य बदलता है. आपके पढ़ने के आखिरी …

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साहित्य और जीवन पर निबंध | Essay on Literature and Life in Hindi

साहित्य और जीवन पर निबंध | Essay on Literature and Life in Hindi! साहित्य समाज का दर्पण है । एक साहित्यकार समाज की वास्तविक तस्वीर को सदैव अपने साहित्य में उतारता रहा है । मानव जीवन समाज का ही एक अंग है । मनुष्य परस्पर मिलकर समाज की रचना करते हैं । इस प्रकार समाज …

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